थोडा थोडा करके तुम्हे सताने में
बातों बातों में तुम्हे हँसाने में
आँखें झुकाके तुम्हारे शर्माने में
सामने हो तो घूर घूर के देखने में
और कभी कभी तुम्हारी डांट खाने में
बड़ा मज़ा आये मुझे यह सब करने में ।।
सुबह सुबह तुम्हारी आँवाज़ सुनने में
रात भर बात करके तुम्हे जगाने में
खो जाना तेरे धीरे धीरे मुस्काने में
पंगे लेके तुझे जान बूझकर रुठाने में
और फिर प्यार से तुझे मानाने में
बड़ा मज़ा आये मुझे यह सब करने में ।।
तुम्हारे हाथो से पचरंगा आचार चखने में
बहुत इंतज़ार के बाद तुमसे मिलने में
बहाने बना कर तुम्हे अपने पास रखने में
मिलने के बाद तुम्हे जाने ना देने में
और छोटी छोटी बातो पे तुमसे लड़ने में
बड़ा मज़ा आये मुझे यह सब करने में ।।
साथ मिलकर अपने भाई बहनों को छेड़ने में
तुम्हारे लिए शरारत भरी शायरी लिखने में
अपनी पुरानी बीती यादें तुमसे बाटने में
तुम्हारी बातें सुनके तुम्हे समझने में
और पल पल तुम्हे अपने करीब लाने में
बड़ा मज़ा आये मुझे यह सब करने में ।।


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